जोहार दोस्तों यह मेरा पहला ब्लॉग पोस्ट है, यहां आपको कई तरह तरह की चीजें गांव से जुड़ी, जीवन पर आधारित, आदिवासी संस्कृति, रीति रिवाज और भी कई चीजें पढ़ने जानने को मिलेगा।
कोयापुनेम 5 दिवसीय प्रशिक्षण के पश्चात कमको मोहनिया में ही आदरणीय डॉ दिग्विजय सिंह मरावी जी के घर जाना हुआ, जहां उनके पिता जी आदरणीय जगत सिंह मरावी जी से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, उन्होंने मेरे कार्यों को सराहा और आदिवासियत के लिए, समाज के लिए कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किए, उनका जीवन और उनके द्वारा कही हर बात प्रेरणास्त्रोत हैं, उनसे आदिवासियत को और बारीकी से जानने को मिला, और प्रकृति के साथ आदिवासियों के पुरखों के समय से जुड़े चीजों को बारीकी से जानने को मिला। प्रकृति के महत्वता को जानने को मिला, आदरणीय जगत सिंह मरावी जी 66 साल के हैं उनके शारीरिक रूप से चलने फिरने और क्रियाकलापों को देखकर लगता नहीं कि वे इस उम्र में भी उतनी ताजगी बनाए हुए हैं। बड़े सादगी और सरल भाषा में बेहद गहरे और महत्वपूर्ण चीजों को समझाए, वे और उनका पूरा परिवार से मिला प्यार मेरे लिए सबसे अहम रहा और उनके जीवन को देखना मेरे लिए नया और प्रेरित करने वाला अनुभव रहा, वे पुरखों के द्वारा बताए मार्गों का बेहद करीब से अनुसरण करते हैं, घर में बगिया फूलों से सजे हैं और उसके साथ साथ सभी फलदार पेड़ जो प...
क्या आदमियों को खाते हैं नागा जनजाति ? झूठ या हकीकत नमस्कार दोस्तों आप सबका स्वागत है फिर से मेरे इस नए ब्लॉग में दोस्तों आज हम बात करेंगे नागा जनजाति के बारे में जिसके बारे में बहुत कुछ कहा सुना जाता है और जानेंगे कितना सच है और कितना झूठ ? दोस्तों नागा जनजाति ( adivasi ) अपने परिधान वेशभूषा और रीति रिवाजों को लेकर अपना अलग पहचान रखती है। नागा जनजाति विशेषकर कि अपने संस्कृति को लेकर बहुत ही संवेदनशील है, इनकी संस्कृति यह कि आज भी ये अपने परिधानों में अपने संस्कृति को झलकाते हैं, नागा जनजाति जहां भी रहे अलग ही पहचान में आते हैं। नागा जनजाति मुख्य रूप से भारत के नागालैंड ( Nagaland) राज्य में पाए जाते हैं। इसी जनजाति के कारण राज्य का नाम नागालैंड पड़ा होगा। पूर्वोत्तर और अंतिम छोर में रहने के कारण नागा जनजाति देश के मुख्य धारा से अछूती रह जाती है, प्रकृति और जंगलों के बीच निवास करने वाली यह जाति प्रकृति के अनुरूप ही स्वयं को ढाल लेने में सक्षम होते हैं। दोस्तों नागा जनजाति की एक और विशेषता यह रही है कि उन्होंने कभी भी दूसरों का शासन स्वीकार नहीं किया, अंग्रेजों ने भी इस जन...